आप सबको नवरात्रि की हार्दिक बधाई ।
कल से आरंभ हो रहा है नवसंवतसर एवं नवरात्रि ,यानि कि सर्वार्थ सिद्धि के लिए महा शक्ति पूजन।
1) नमो देवि विश्वेश्वरि प्राणनाथे
सदानन्दरुपे सुरानन्दे ते।
नमो दानवान्त्प्रदे मानवानाम्-
अनेकार्थदे भक्तिगम्यस्वरुपे॥
अर्थात् :- हे विश्वेश्वरि ! हे प्राणो की स्वामिनी ! सदा आनन्द के रूप मे रहने वाली तथा देवताओं को आनन्द प्रदान करने वाली हे देवि! आपको नमस्कार है। दानवों का अंत करने वाली, मनुष्यों की समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली तथा भक्ति मार्ग से अपने स्वरूप का दर्शन देने वाली हे देवि ! आपको नमस्कार है ।
2) न ते नामसंख्यां न ते रूपमीदृकत्था
को अपि वेदादिदेवस्वरुपे।
त्वमेवासि सर्वेषु शक्तिस्वरूपा
प्रजासृष्टिसंहारकाले सदैव॥
अर्थात :- हे आदि देव स्वरूपिणी ! आपके नामों की निश्चित संख्या तथा आपके इस रूप को कोई नहीं जान सकता। सब मे आप ही विद्यमान है । जीवों के सृजन और संहार काल मे सदा शक्ति स्वरूप से आप ही कार्य करती हैं ।

विशिष्टमायास्वरूपा , प्रज्ञामयी, परमेश्वरी, माया की अधिष्ठात्री, सच्चिदानंद स्वरूपिणी भगवती जगदंबा का ध्यान पूजन जाप तथा वंदन करना चाहिए । उससे वे भगवती प्राणी पर दया करके उसे मुक्त कर देती हैं और अपनी अनुभूति करा कर अपनी माया को हर लेती हैं । समस्त भुवन माया स्वरूप है तथा वे ईश्वरी उसकी नायिका हैं ।
जय माता दी ।
कल से आरंभ हो रहा है नवसंवतसर एवं नवरात्रि ,यानि कि सर्वार्थ सिद्धि के लिए महा शक्ति पूजन।
1) नमो देवि विश्वेश्वरि प्राणनाथे
सदानन्दरुपे सुरानन्दे ते।
नमो दानवान्त्प्रदे मानवानाम्-
अनेकार्थदे भक्तिगम्यस्वरुपे॥
अर्थात् :- हे विश्वेश्वरि ! हे प्राणो की स्वामिनी ! सदा आनन्द के रूप मे रहने वाली तथा देवताओं को आनन्द प्रदान करने वाली हे देवि! आपको नमस्कार है। दानवों का अंत करने वाली, मनुष्यों की समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली तथा भक्ति मार्ग से अपने स्वरूप का दर्शन देने वाली हे देवि ! आपको नमस्कार है ।
2) न ते नामसंख्यां न ते रूपमीदृकत्था
को अपि वेदादिदेवस्वरुपे।
त्वमेवासि सर्वेषु शक्तिस्वरूपा
प्रजासृष्टिसंहारकाले सदैव॥
अर्थात :- हे आदि देव स्वरूपिणी ! आपके नामों की निश्चित संख्या तथा आपके इस रूप को कोई नहीं जान सकता। सब मे आप ही विद्यमान है । जीवों के सृजन और संहार काल मे सदा शक्ति स्वरूप से आप ही कार्य करती हैं ।
विशिष्टमायास्वरूपा , प्रज्ञामयी, परमेश्वरी, माया की अधिष्ठात्री, सच्चिदानंद स्वरूपिणी भगवती जगदंबा का ध्यान पूजन जाप तथा वंदन करना चाहिए । उससे वे भगवती प्राणी पर दया करके उसे मुक्त कर देती हैं और अपनी अनुभूति करा कर अपनी माया को हर लेती हैं । समस्त भुवन माया स्वरूप है तथा वे ईश्वरी उसकी नायिका हैं ।